Google+ Badge

Friday, 5 May 2017

बन्द पलकों के ख्वाब टूटे हैं

बन्द पलकों के ख्वाब टूटे हैं
खुली आँखों का इंतज़ार नहीं टूटा
दो क़दम चलकर तेरे हाथ छूटे हैं
तेरा जीवन भर का साथ नहीं छूटा
तेरे शब्दों की गूँज से दिल टूटा है
मेरा अपनी उम्मीदों पर एतवार नहीं टूटा ....

सालिहा मंसूरी -
12.01.16   10:30 pm 

0 comments:

Post a Comment