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Friday, 11 August 2017

इस रात के ख़त्म होते ही

इस रात के ख़त्म होते ही
ये स्याह अँधेरे भी ख़त्म हो जाएंगे
जब इक नई सुबह
तुम्हारे घर के आँगन में
सुनहरी धूप बनकर बरसेगी 

- सालिहा मंसूरी
09.02.16     04.10 pm 

Thursday, 10 August 2017

किसी की याद दिल से

किसी की याद दिल से
यूँ जुदा नहीं होती
साँस रुक जाये लेकिन
तन्हाई फ़ना नहीं होती
उम्र भर चलती है हर सफ़र में
किसी साये की तरह साथ – साथ 

- सालिहा मंसूरी

  22.02.16 

Monday, 26 June 2017

चलो चलें दोस्त !

चलो चलें दोस्त !
इस दुनिया से बहुत दूर
कि पीछे छूट जाए , ये सारा ज़माना
और खो जाएँ , उस दुनिया की रंगीनी में हम तुम
जहाँ ख़त्म हो जाए ये सारा फ़साना .....

- सालिहा मंसूरी
04.02.16   03.49 pm 

न तुमने अपनाया न दुनिया ने

न तुमने अपनाया न दुनिया ने
देखो ! फिर भी जिन्दा हूँ मैं   
बस ! इक उम्मीद के सहारे ....

- सालिहा मंसूरी
29.01.16   04.43 pm 

Sunday, 25 June 2017

मिल जाओ किसी मोड़ पर इक दिन तुम

मिल जाओ किसी मोड़ पर इक दिन तुम
सुनहरी धूप बनकर , तो फिर से जी उठूँ मैं 
बस जाओ मेरी आँखों में किसी शब तुम
ख़्वाबों की ताबीर बनकर , तो फिर से खिल उठूँ मैं
किसी महके हुए फूल की तक़दीर बनकर ....

- सालिहा मंसूरी
27.01.16  09.00 pm   

Friday, 23 June 2017

मुझे क्या समझोगे दुनिया वालो

मुझे क्या समझोगे दुनिया वालो
जब खुद को ही समझा नहीं
मुझे क्या संभाल पाओगे
जब खुद को ही संभाल पाया नहीं

- सालिहा मंसूरी

25.01.16 pm 

Wednesday, 14 June 2017

कितने बार दिल हारा है

कितने बार दिल हारा है
कितनी ही बार हारी हूँ मैं

फिर भी हर बार संभाला है खुद को
कितनी ही बातों से समझाया है खुद को

कितनी उम्मीदें ,कितनी ख्वाहिशें ,कितने ही ख़्वाब
बस ! जलते बुझते से जुगनू की तरह

दफ्न पड़े हैं आज भी
ख़ामोशी की कब्र में ....

सालिहा मंसूरी

23.01.16  05:58 pm 

तोड़ दो इक दिन आकर

तोड़ दो इक दिन आकर
इन बंद लबों की ख़ामोशी को तुम
और दे दो इक हंसीं मुस्कराहट
इन सहमे से लबों पर तुम ....

सालिहा मंसूरी

21.01.16 pm 

जा रही हूँ तुझसे बहुत दूर

जा रही हूँ तुझसे बहुत दूर
तेरी हर याद को दामन में समेटे हुए
संजोकर रखूँगी इक इक पल को
पलकों की इक इक बूँद में लपेटे हुए ....

सालिहा मंसूरी  
              
20.01.16  08:07 pm 

Saturday, 10 June 2017

भीड़ मैं भी तन्हां रहती हूँ आजकल

भीड़ मैं भी तन्हां रहती हूँ आजकल
कितने ही चेहरों के साथ भी खोई रहती हूँ आजकल
कितने ही सवालों के जवाब मैं उलझी रहती हूँ आजकल
लेकिन ख़ामोशी से सब कुछ सह लेती हूँ आजकल

सालिहा मंसूरी –

19 .01.16  06:55 

Sunday, 4 June 2017

कितने ज़मानों से वो यारों से बिछड़ा है

कितने ज़मानों से वो 
यारों से बिछड़ा है
उसे यारों से मिला दो
तो एहसान होगा !

तोड़ कर बन्धन की 
इक इक जंजीर को
उसे आसमां की उड़ान दे दो
तो एहसान होगा !

बंद पिंजड़े की जंजीरों में
कितना सिमटा हुआ है वो
उसे आज़ादी की हवा दे दो
तो एहसान होगा !

सालिहा मंसूरी -
16.01.16  08:50 am 

बेबाक , बेख़ौफ़ होकर

बेबाक , बेख़ौफ़ होकर
इस दुनिया में जीना है तुम्हें
न दुनिया से डरना      
न लोगों की सुनना
बस ! अपने दिल की
आवाज़ को सुनना है तुम्हें ....

सालिहा मंसूरी -

15.01.16 pm

Saturday, 3 June 2017

तुम्हीं ने हँसना सिखाया था

तुम्हीं ने हँसना सिखाया था
तुम्हीं ने रोना सिखा दिया
तुम्हीं ने जीना सिखाया था
और आज तुम्हीं ने मरना सिखा दिया .....

सालिहा मंसूरी

15.01.16 pm


प्यार तो प्यार है

प्यार तो प्यार है , कोई सौदा नहीं है
प्यार का नाम भी , बस ! प्यार है
कोई दूजा नहीं है .....

सालिहा मंसूरी

15.01.16  08:55 pm 

इस दुनिया से रुखसत होते वक़्त भी

इस दुनिया से रुखसत होते वक़्त भी
होठों पे तेरा नाम होगा
तू मेरे साथ न सही
लेकिन मेरा साया
हर वक़्त तेरे साथ होगा .....

सालिहा मंसूरी -

08:27 pm  15.01.16

Friday, 2 June 2017

फूल ही फूल हैं

फूल ही फूल हैं , रंगे फिज़ा में
फिर भी है ख़ामोश तू
ढूंढती है किसको बेख़बर 
यूँ अकेली आज तू ......

सालिहा मंसूरी -

15.01.16   06.41 pm 

सोचा था अब जो तुम मिले हो

सोचा था अब जो तुम मिले हो
तो आसाँ है हर सफ़र जिंदगी का अपना

सोचा न था दो क़दम साथ चलकर
यूँ ख़त्म हो जायेगा हर सफ़र जिंदगी का अपना

सालिहा मंसूरी -

14.01.16    04:49 pm 

Sunday, 7 May 2017

तुम कभी नहीं मिलोगे मुझे

तुम कभी नहीं मिलोगे मुझे
अब ये जान चुकी हूँ मैं
अपने दिल से हर इक ख्वाब
मिटाना होगा मुझे
अब ये मान चुकी हूँ मैं

मेरी उम्मीदों से भरा हौसला भी
अब टूट चूका है
मेरा अटल अमर विश्वास भी
ज़र्रा – ज़र्रा होकर बिखर चुका है
ज़िन्दगी की हर जंग
हार चुकी हूँ मैं
हाँ ! अब हार चुकी हूँ मैं ...


सालिहा मंसूरी 

28.01.16
04.17 pm

Friday, 5 May 2017

बन्द पलकों के ख्वाब टूटे हैं

बन्द पलकों के ख्वाब टूटे हैं
खुली आँखों का इंतज़ार नहीं टूटा
दो क़दम चलकर तेरे हाथ छूटे हैं
तेरा जीवन भर का साथ नहीं छूटा
तेरे शब्दों की गूँज से दिल टूटा है
मेरा अपनी उम्मीदों पर एतवार नहीं टूटा ....

सालिहा मंसूरी -
12.01.16   10:30 pm 

Friday, 10 February 2017

उजड़ी हुयी दुनिया को

उजड़ी हुयी दुनिया को 
प्यार की महफ़िल समझ बैठे 
डूबी हुयी कश्ती को 
प्यार की मंजिल समझ बैठे 
कितने नादां हैं , ये दुनिया के लोग भी 
जो टूटे हुए दिल को भी  
ज़ख्मों का समन्दर समझ बैठे .......  

सालिहा मंसूरी 

12.01.16  09:15 pm

Thursday, 9 February 2017

मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह

मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह 
और खो गए इक गुजरते राही की तरह 
मुझे देखकर ठिठके भी नहीं 
संभालना तो बहुत दूर की बात है ..... 

सालिहा मंसूरी 

09.01.16    04:08 pm

Wednesday, 8 February 2017

किनारा मिले न मिले

किनारा मिले न मिले 
फिर भी मैं चलती जाऊँगी 
मंजिल मिले न मिले 
फिर भी मैं बढ़ती जाऊँगी 
राही रुके न रुके 
फिर भी मैं संभलती जाऊँगी ...... 

सालिहा मंसूरी 

04.01.16   07:45 am

Tuesday, 7 February 2017

तेरी ज़िन्दगी की हर – इक राह आसां हो जाए

तेरी ज़िन्दगी की हर – इक राह आसां हो जाए 
तेरे सपनों का हर – इक ख्वाब पूरा हो जाए 
तेरी साँसों की डोर न तुझसे दूर हो कभी 
मेरी साँसों की डोर भी तेरी साँसों से जुड़ जाए ..... 

सालिहा मंसूरी 

02.01.16   12:45 pm

Monday, 6 February 2017

पल – दो – पल की खुशियाँ थीं वो

पल – दो – पल की खुशियाँ थीं वो 
पल – दो – पल के सपने 
आँख खुली तो , कुछ भी पास नहीं था 
बस ! थे कुछ बीते लम्हे ...... 

सालिहा मंसूरी 

02.01.16   05:22  pm

Sunday, 5 February 2017

ये सूरज , चाँद – सितारे

ये सूरज , चाँद – सितारे 
हर वक़्त रहते हैं , पास हमारे 
हम न रहेंगे , फिर भी चमकेंगे 
हर दिन – रात , साथ हमारे ......  

सालिहा मंसूरी 

01.01.16     07:07 am 

Saturday, 4 February 2017

सूने से दिन- सूनी सी रात

सूने से दिन- सूनी सी रात
फिर भी बुनते रहते हैं
इक खूबसूरत सा ख्वाब
जानते हैं कि – 

तुम नहीं मिलोगे कभी
फिर भी देते रहते हैं
खुद को कुछ उम्मीदों की आस
ठहरा हुआ है आज भी 

इस अँधेरे से घर में
तेरी यादों का वजूद
और बिखरे पड़े हैं
खामोशी में सिमटे 

कुछ अनकहे , कुछ अनसुने
अधूरे से शब्द ! 

सालिहा मंसूरी 


26.12.15 10:35  pm 

Friday, 3 February 2017

जीने नहीं देती है , हर याद तुम्हारी

जीने नहीं देती है , हर याद तुम्हारी
हँसने नहीं देती है , हर बात तुम्हारी
बस ! हर वक़्त धड़कता रहता है
दिल में नाम तुम्हारा
यही वो पल है , जिसे मैं भुला नहीं पाती ..... 


सालिहा मंसूरी

Thursday, 2 February 2017

जिसको माना था अपना

जिसको माना था अपना
वही बेगाना हुआ
जिसको चाहा था पाना
वही अफसाना हुआ 

ये तक़दीर है या
किस्मत का कोई खेल
जिस राह से गुजरो
बस ! यही इक तराना हुआ ---- 


सालिहा मंसूरी

Wednesday, 1 February 2017

तुम नहीं मिले तो क्या हुआ

तुम नहीं मिले तो क्या हुआ 
तेरे रूप में मिला मुझे आसमां
वो आसमां 
जो तेरे साये की तरह 
हर -वक़्त मेरे साथ चला 
हर -वक़्त मेरे साथ रहा 
कड़ी धूप में भी 
और अँधेरी रात में भी ..... 


सालिहा मंसूरी

Tuesday, 31 January 2017

हर -सुबह तुम्हारी यादों की

हर -सुबह तुम्हारी यादों की 
बारात लेकर आती है 
और मैं तुम्हारी यादों की 
बारात के स्वागत के लिये
सूरज की इक -इक किरण को 
अपनी मुट्ठी में समेटती 

बड़ी उत्सुकता से
उस नीले आसमान की तरफ 
इक टक तकती 
तुम्हारे आने का 
इन्तजार करती रहती 
लेकिन न तुम आते 

और न तुम्हारी कोई खबर 
और फिर अचानक
धीरे -धीरे वो किरणें
मेरी मुट्ठी से 
बिखरने लगतीं .....


सालिहा मंसूरी

Monday, 30 January 2017

बीते दिनों तुमसे बिछड़े

बीते दिनों तुमसे बिछड़े 
इक अरसा हो गया 
लेकिन हर -दिन 
हर -पल, हर- क्षण 

तुम याद आते रहे 
और धड़कते रहे 
इस धड़कन में 
इक ख्वाब की तरह 

वो ख्वाब जो कभी 
पूरा न हो सका
लेकिन उस ख्वाब को 
पूरा करने की ख्वाहिश 

आज भी बाक़ी है 
इस दिल में 
इक विशवास की 
जीत की तरह .....


सालिहा मंसूरी