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Sunday, 4 June 2017

कितने ज़मानों से वो यारों से बिछड़ा है

कितने ज़मानों से वो 
यारों से बिछड़ा है
उसे यारों से मिला दो
तो एहसान होगा !

तोड़ कर बन्धन की 
इक इक जंजीर को
उसे आसमां की उड़ान दे दो
तो एहसान होगा !

बंद पिंजड़े की जंजीरों में
कितना सिमटा हुआ है वो
उसे आज़ादी की हवा दे दो
तो एहसान होगा !

सालिहा मंसूरी -
16.01.16  08:50 am 

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