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Sunday, 25 June 2017

मिल जाओ किसी मोड़ पर इक दिन तुम

मिल जाओ किसी मोड़ पर इक दिन तुम
सुनहरी धूप बनकर , तो फिर से जी उठूँ मैं 
बस जाओ मेरी आँखों में किसी शब तुम
ख़्वाबों की ताबीर बनकर , तो फिर से खिल उठूँ मैं
किसी महके हुए फूल की तक़दीर बनकर ....

- सालिहा मंसूरी
27.01.16  09.00 pm   

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