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Friday, 2 June 2017

फूल ही फूल हैं

फूल ही फूल हैं , रंगे फिज़ा में
फिर भी है ख़ामोश तू
ढूंढती है किसको बेख़बर 
यूँ अकेली आज तू ......

सालिहा मंसूरी -

15.01.16   06.41 pm 

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