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Friday, 2 June 2017

सोचा था अब जो तुम मिले हो

सोचा था अब जो तुम मिले हो
तो आसाँ है हर सफ़र जिंदगी का अपना

सोचा न था दो क़दम साथ चलकर
यूँ ख़त्म हो जायेगा हर सफ़र जिंदगी का अपना

सालिहा मंसूरी -

14.01.16    04:49 pm 

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